:
Breaking News

Samastipur News: समस्तीपुर में फलदार पौधों की होगी डिजिटल गणना, बगीचों की जियो टैगिंग से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

समस्तीपुर में फलदार पौधों और बगीचों की डिजिटल गणना व जियो टैगिंग की जाएगी। कृषि मैपर एप के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं, तकनीकी सलाह और अनुदान का लाभ मिलेगा।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के फल उत्पादक किसानों के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। अब जिले में फलदार पौधों की खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए बगीचों की डिजिटल निगरानी की जाएगी। उद्यान विभाग की नई पहल के तहत आम, लीची, अमरूद, नींबू और बेर जैसे फलदार पौधों की डिजिटल गणना कराई जाएगी। इसके साथ ही हर बगीचे की जियो टैगिंग भी होगी, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं और तकनीकी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

जानकारी के अनुसार उद्यान विभाग कृषि मैपर एप के जरिए जिलेभर में बगीचों का ऑनलाइन सर्वे कराएगा। इस सर्वे के दौरान प्रत्येक बगीचे की लोकेशन, पौधों की संख्या, उत्पादन क्षमता और उनकी वर्तमान स्थिति का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। इससे जिले में फल उत्पादन का सटीक आंकड़ा उपलब्ध हो सकेगा और योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब तक जिले में फलदार पौधों का सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। यही वजह थी कि कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों तक लाभ पहुंचाने में परेशानी होती थी। लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस इलाके में कौन-सी फसल बेहतर उत्पादन दे रही है और किस क्षेत्र में किस प्रकार की सहायता की जरूरत है।

समस्तीपुर में वर्तमान समय में करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जा रही है, जबकि लगभग 600 हेक्टेयर क्षेत्र में लीची के बगीचे मौजूद हैं। इसके अलावा कई इलाकों में अमरूद, नींबू और बेर की खेती भी तेजी से बढ़ रही है। उद्यान विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।

जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सुमित सौरभ ने बताया कि जिले में फलदार पौधों की डिजिटल गणना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और बागवानी को आधुनिक तरीके से विकसित करना है। उन्होंने कहा कि कृषि मैपर एप के माध्यम से प्रत्येक किसान और उसके बगीचे का विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इससे किसानों को समय पर अनुदान, तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान पौधों की सेहत, उनकी वृद्धि और उत्पादन क्षमता की जानकारी भी एकत्र की जाएगी। यदि किसी इलाके में पौधों में रोग या पोषक तत्वों की कमी पाई जाती है तो वहां के किसानों को विशेषज्ञों की सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन में मदद मिलेगी।

उद्यान विभाग की इस पहल को किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यह समझना आसान हो जाएगा कि जिले के किस इलाके की मिट्टी और जलवायु किस फल के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है। इसके आधार पर किसानों को उसी प्रकार की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन मिल सके।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि सही क्षेत्र में सही फसल लगाई जाए तो पौधों में रोग कम लगते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। समस्तीपुर जैसे जिले में जहां बड़ी संख्या में किसान बागवानी पर निर्भर हैं, वहां यह पहल आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिहाज से भी इस योजना को अहम माना जा रहा है। फलदार पौधों की खेती बढ़ने से बगीचों की देखरेख, तुड़ाई, पैकेजिंग और फलों की ढुलाई जैसे कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा फलों पर आधारित छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है। आम, अमरूद और नींबू के उत्पादन में वृद्धि होने पर जूस, जैम, जेली और अचार बनाने वाले उद्योगों को नया बाजार मिलेगा।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि सरकार की यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो उन्हें काफी लाभ मिल सकता है। किसानों को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिलेगा और अनुदान वितरण में भी आसानी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में तकनीक की भूमिका और बढ़ेगी। ड्रोन सर्वे, मोबाइल एप और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी तकनीकें खेती को अधिक आधुनिक और लाभकारी बनाने में मदद कर रही हैं। समस्तीपुर में शुरू की गई यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उद्यान विभाग ने जिले के सभी प्रखंडों में जल्द सर्वे कार्य शुरू करने की तैयारी कर ली है। विभागीय टीम किसानों से संपर्क कर बगीचों का डेटा जुटाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद जिले में फल उत्पादन को लेकर एक विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।

अब किसानों की नजर इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि इससे न केवल फल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जिले में बागवानी आधारित रोजगार और छोटे उद्योगों को भी नई पहचान मिलेगी।

यह भी पढ़ें:

समस्तीपुर की प्रोफेसर कॉलोनी में जलजमाव से लोग परेशान

महिला ऑपरेटर ने बचाया 10 MVA ट्रांसफॉर्मर

समस्तीपुर में 41 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *